वाराणसी में स्वामी सानंद जी के उत्तराधिकार को लेकर छिड़ सकती है जंग !

वाराणसी–मरने के बाद जूलियस सीजर और महान हो गया था। कुछ ऐसा ही स्वामी सानंद जी की मौत के बाद वाराणसी में चरितार्थ होने जा रहा है। क्योंकि यहां के लोंगो को लग रहा है सानंद जी का उत्तराधिकारी बनकर गंगा आंदोलन को हस्तगत किया जा सकता है।

सानंद जी को दीक्षित करने वाले गुरु अविमुक्तेश्वरानंद का मानना है कि सानद जी का श्री विद्या मठ से गहरा नाता था । उन्हें यही पर दीक्षित किया गया था और उन्होंने गंगा के लिए पहला आंदोलन यही से शुरू किया था। इसलिए उनका श्राद्ध और भंडारा पूरे विधि विधान से यहीं किया जाएगा। लेकिन दूसरी तरफ गंगा महासभा के महासचिव स्वामी जितेन्द्रा नंद जी का कहना है कि सानंद जी एक सन्यासी थे उनका त्रिपिंडी श्राद्ध या नारायण बलि श्राद्ध कैसे किया जा सकता है। यदि कोई करेगा भी तो वह कोई गैर ब्लड रिलेशन वाला कैसे कर सकता है । उन्होंने तो सब कुछ लिखित में दिया है की कौन उनका क्या होगा।

गौरतलब है कि जल पुरुष के नाम से विख्यात राजेन्द्र सिंह स्वामी सानंद जी पुतला बनाकर वाराणसी लेकर आने वाले है जिनका एक प्रोसेसन निकला जाएगा और गंगा किनारे उनका प्रतीकात्मक श्राद्ध स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद करेंगे। लेकिन गंगा महासभा का दावा है कि सानंद जी ने सब कुछ गंगा महासभा को सुपुर्द किया है इसलिए तेरहवी के दिन भंडारा गंगा महासभा करेगी।