यूपी में कम हुईं शराब की दुकानें, फिर भी बढ़ा आबकारी राजस्व

यूपी में कम हुईं शराब की दुकानें, फिर भी बढ़ा आबकारी राजस्व

(अंग्रेजी शराब इस साल सितंबर तक 9.26 करोड़ बोतल बिकी, जो पिछले साल इस दौरान बिकी 7.08 करोड़ बोतल से 30.8 फीसदी ज्यादा है। बीयर की बात करें तो उसकी खपत में भी दस फीसदी की वृद्धि हुई है। पिछले साल बीयर की 16.58 करोड़ बोलत बिकी थीं, जबकि इस साल उक्त समयावधि में 18.26 करोड़ बोतल बीयर बिकी)

लखनऊ :NKB:- यूपी में शराब की दुकानें भले ही कम हुई हों, लेकिन देसी और विदेशी शराब की खपत के साथ राजस्व में तेजी से इजाफा हुआ है। नई आबकारी नीति में लॉटरी के जरिए दुकानों के आंवटन के बाद इस वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीनों में आबकारी राजस्व पिछले साल की अपेक्षा 50 फीसदी बढ़ गया है।

पिछले साल जहां छह महीनों में सरकार को 7662.48 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, वहीं इस साल राजस्व 3836.06 करोड़ रुपये बढ़कर 11,498.54 करोड़ रुपये पहुंच गया। आबकारी मंत्री माने तो यह नई आबकारी नीति की सफलता है। अगले साल की नीति में कुछ और संशोधन कर इसे और सरल बनाया जाएगा।

30 फीसदी तक बढ़ी शराब की खपत

पिछले वित्तीय वर्ष की अपेक्षा इस साल के शुरुआती छह महीनों में देशी और अंग्रेजी दोनों शराबों की खपत तीस फीसदी तक बढ़ी। सितंबर 2018 तक प्रदेश में 20.00 करोड़ बल्क लीटर देशी शराब बिकी। जो सरकारी तय लक्ष्य (एमडीक्यू) 18.25 करोड़ बल्क लीटर से 9.6 फीसदी अधिक है। लेकिन, पिछले साल सितंबर तक प्रदेश में 15.35 करोड़ बल्क लीटर देसी शराब बिकी थी, जिसकी अपेक्षा इस साल देसी शराब की बिक्री में 30.3 फीसदी की वृद्धि हुई।

इसी तरह अंग्रेजी शराब सितंबर तक 9.26 करोड़ बोतल बिकी, जो पिछले साल इस दौरान बिकी 7.08 करोड़ बोतल से 30.8 फीसदी ज्यादा है। बीयर की बात करें तो उसकी खपत में भी दस फीसदी की वृद्धि हुई है। पिछले साल बीयर की 16.58 करोड़ बोतल बिकी थीं, जबकि इस साल उक्त समयावधि में 18.26 करोड़ बोतल बीयर बिकी।

303 दुकानें खत्म हुईं
केवल सितंबर महीने की बात करें तो पिछले वित्तीय वर्ष(2017-18) में सरकार ने 1,237 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व वसूला था जबकि इस साल सितंबर में सरकार को आबकारी राजस्व में 238.61 करोड़ रुपये बढ़ कर मिले। इस सात सितंबर में 1475.68 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा हुए। हालांकि राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में सितंबर तक 13,300 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य रखा था। लेकिन, आबकारी महकमा 11498.54 करोड़ रुपये का ही राजस्व जुटा सका। जो तय लक्ष्य का 86.5 फीसदी है। राजस्व वसूली में पिछले साल की अपेक्षा वसूली में वृद्धि तब हुई, जब सात बार लॉटरी के बाद भी प्रदेश में 303 दुकानों का आवंटन नहीं हो सका। लिहाजा पहली बार सरकार को एक साथ 303 शराब की दुकानें निरस्त करनी पड़ीं। इनमें ज्यादातर देसी शराब की दुकानें थीं